Sunday, December 12, 2010

                                                              कब होगा देश का सुधार..                                                                     आज  हिंदुस्तान  हिंदी समाचार पत्र में यह खबर पढने को मिली की उतर प्रदेश  पुलिस फेसबुक  पर छोड़ी शीकायत पर भी कार्य वाही कर रही है ! उसी कड़ी में ,,,, मै भी एक बात यहाँ  इस कहना चा हता हु  की दिल्ली  के पहाड़ गंज  के एस डी ऍम  ऑफिस में जाती प्रमाण पत्र ,, जन्म प्रमाण पत्र बन वाने  में लोगो को बहुँत परेशानी यो  का सामना करना पड़ता है ऑफिस के कर्मचारीयो  का लोगो के प्रत्ति सही नहीं होता है  वो लोगो को नाहक ही परेशान करते है कभी कहते है की यह ले कर आओ कभी कहते है वो ले कर आओ ऐसे  ऐसे पप्पेर ले कर आने को कहे है की लोग अपना सर धुन लेते है मेरे एक दोस्त ने अपनी बच्ची की जन्म पत्री बनवाने के लिए एस डी ऍम ऑफिस पहाड़ गंज में आवदेन किया पर पूरा एक साल बीत जाने के बाद भी वह अपनी बच्ची की जन्म 
पत्री नहीं बनवा पाया ऑफिस की ही कर्मचारी  कोशल्या सतपाल और अन्यो की लाल फीता सही के चलते एक सही आदमी अपनी बच्ची की जन्म पत्री नहीं बनवा पाया जब की वही दुसरे लोगो ने इन्ही लोगो की मदद से मकान न  ६३०६, नबी  करीम ,गली  रवि दास,पहाड़ गंज ,नई दिल्ली फर्जी कागजों के बल पर जन्म पत्री  बनवा ली और जब हमने इस बावत आर टी आई  के माध्यम से जब एस डी ऍम ऑफिस से जानकारी मांगी तो हमे उन लोगो की जानकारी यह कह कर देने से इंकार कर दिया की वो किसी की निजी जानकारी नहीं दे सकते (जब की हकीकत यह है की जिन लोगो ने अपने बच्चो की जन्म पत्री या  बनवाई है उन लोगो का यहा का कोई भी प्रमाण नहीं है )जो सही लोग है वो अपने काम को करवाने के लिए दर ,दर भटक रहे है ऐसा नहीं की हमने इस बावत किसी से कहा नहीं एक बार हमारी बात एस डी ऍम साहब वी के वर्मा  जी  से भी हुई थी उन्हों ने कहा भी था की वो  इस पर ध्यान देगे  पर...............उनका  तबादला हो गया और हम कोई भी बात नहीं कर सके ,और बात आयी गयी हो गयी ,परन्तु आज जब हिंदुस्तान में पढ़ा  की फेस बुक  पर छोड़ी शी कायत पर पुलिस ने की कार्य वाही तो दिल ने इस बात को भी हिंदुस्तान के लोगो के बीच ले जाने की कही की शायद ये बात भी कोई भला बन्दा पढ़ ले और ................................... ललित  भसोड़   9313052941

Friday, October 8, 2010

Tuesday, July 20, 2010

Friday, July 16, 2010

Wednesday, July 14, 2010

आसमान से आग बरस रही है  इस साल गर्मी ऐसा लगता है की दिल्ली में पी छले  साल के मुकाबले कुछ जयादा ही  पड़ रही है  उसके ऊपर से बिजली कटोती भी जयादा हो रही है पसीनो में बुरा हाल हो जाता है बी एस इ  एस  वालो की मनमर्जी चल रही है  कही कोई सुनने वाला नहीं है  रामनगर कंप्लेंट सेन्टर में बी एस इ एस वालो ने जो अपने आदमी कंप्लेंट लिखने वाले बिठा रखे है उन्हें तो बात तक करने की तमीज नहीं है  आधिकतर वो फ़ोन पर ठीक से बात तक नहीं करते है   और अपनी मर्ज़ी से काम करते है उन्हें पब्लिक की शिकायत से कुछ लेना देना नहीं कुछ कहने पर तो वो लोग झ गडा करने से भी नहीं चूकते है ऊपर किस के पास जाये कोन सुनेगा पता नहीं पर इतना तो है की दिल्ली वालो को अपने घ र  खर्च  से जयादा अपने बिजली का बिल भरने की ज्यादा चिंता रहती है क्यों की इन गुंडों  को तो तो सरकार का आशीर्वाद मिला हुआ है इन से कोन जीत सकता है 

Monday, July 12, 2010

dhanak samaj se appel

  कल धानक  सभा  दिल्ली  की एक  15  सदस्यों  की एक  सभा का आयोजन  किया गया  जिस मै धानक समाज के  52  गोत्रो  पर  विचार विमर्श हुआ  की किस प्रकार से धानक संमाज पूरे ही देश मै होते हुए  भी  किस प्रकार से अपनी पहचान को  खोता ही जा रहा है   आज समाज के लोगो को  अपने 52  गोत्रो के बारे मै भी नहीं पता है और बहुँत से लोग अपने गोत्रो को भी छिपा रहे है समाज मै  जिस से आने वाले समय में  समाज को  भारी नुक्सान हो सकता है लोग जाने अनजाने ही अपने ही गोत्रो में शादी  विवाह  ना कर बेठे  क्यों की जिस पराक्र से आज हम अपने गोत्रो को भूलते जा रहे है  या अपने गोत्रो  को झूठी शान की खातिर बदल लेते है जैसे  की  खानाग्वल  अपने  आप को  खन्ना  लगाने लगे है  नीना निया  अपने आ को  निर्माण  सुरलिया  सोलंकी  ऐसे ही अनेको उदहारण है जो की समाज को नुक्सान पहु चा  रहे  है  लोगो की यह प्रवति बिलकुल भी ठीक नहीं है  क्यों की इस से समाज को जो नुक्सान पहु च  रहा है उस की कभी  भी पूर्ति  नहीं होगी और हो सकता है के आने वाले समय में धानक समाज अपनी पह चान ही ना खो दे  तो कल उस सभा में समाज के बावन गोत्रो पर चर्चा हुई और यह निष्कर्ष निकला गया की समाज के पूरे बावन गोत्रो  को पूरे देश में रह रहे हमारे धानक समाज के लोगो के बीच ले जाया जाये और  वास्तविक बावन गोत्रो  को समाज के समस्त लोगो तक पहु चाया जाये जिससे लोग अपने लोग पह चान  पाए  साथ ही लोगो को जागरूक  भी किया जाये की वो अपने गोत्रो के साथ छेड़ छाड़ ना करे  जिस से की लोगो मै भ्रम ना फेले  इस के साथ ही में अपने समस्त धानक भाइ यो से इस  ब्लॉग के माध्यम से कहना चहाता  हू की उनके पास जो भी जानकारी धानक समाज  के बावन गोत्रो के बारे में हो वो कृपा  कर  के युवा धानक सभा दिल्ली  को उनके बारे में बताने का कृपा  करे  वैसे जो बावन गोत्रो की लिस्ट हमारे पास है वो में य हा  पर दाल रहा हू .............बागड़ी ..बमनिया ...बुमरा...बारवाल ..ब छेरी वाल ...भांड ...मावर ....इटकान ...इन्दोर्रिया ... किराड़....कायथ ......क छोटिया ......खानग वाल ....खरोड...खेर्रा ....खटक .....खर कटा ....खुड़िया....गुरिया .... गुडला ....चेडवाल ....झांट.... जाट....टांक ....ढ लोड .... डाबला.....तुर्किया .....तंवर ....दगल....धी मान ...निनानिया ....पचेर वाल .....फरंड....भसोड़ .....बो खड़.....बोकना ...बोकडा ....बावलिया ...भरोटिया.....  मुं दडदिया ....मोरवाल .....लडवाल ....ल्गुरिया .....सीलन ....सीवान ....सुरलिया .....रंगभ रिया ......सोलिया .......और ....सोलिया   ......................................................................ललित भसोड़ .......9313052941

Saturday, July 10, 2010

PHI R POOJA KYO

                          कहा जाता है की इन्सान का जनम   85  करोड़ योनियों  मे जनम लेने के बाद वो अगर बहुँत अच्छे  करम कियो हो तब ही मिलता है ऐसा हमारे हिन्दू धर्म मे भी कहा गया है परन्तु एक बात मेरे दिमाग मे नहीं आती की जब मानव जनम  85  करोड़ जन्मो मे अच्छे कर्मो कोकरने के बाद मिलता है तो फिर इस जनम मे मिलाने वाले दुःख तखलीफ़ किस कर्मो  के कारन से होते  है   ........ ऐसा भी कहा जाता है की उस ईश्वर की मर्ज़ी के बिना एक पता बी नहीं हिलता है  जो कुछ भी होता है सब उस की मर्ज़ी से होता है जीवन मे चा हे  वो अच्छा हो या फिर बुरा  जब सब कुछ उसे की मर्ज़ी से ही हो रहा है तो फिर हमारे जीवन मे पूजा का प्रावधान क्यों बना दिया गया समझ से बिलकुल ही परे है  क्यों हम पूजा अर्चना कर उस ईश्वर  से प्राथना करते  है की वो हमारी  दुखो को दूर करे                                                                                                               .

Friday, July 9, 2010

mera kyya hoga

क्या बात है लाला जी आज बहुँत उदास नज़र आ रहे हो  सुबाह से आप को परेशानी मै देख रहा हु  कोई ऐसी वैसी बात तो नहीं है अगर कोई बात है तो बता दो मन हल्का हो जायगा बारहा नम्बर वाले शर्मा जी ने जब बाबु लाल जी से पूछा तो वो कुछ भी ना बता सके बस अपने आप मै ही बतियने लगे तो गुप्ता जी ने उन्हें टोका अरे  क्या हुआ लाला जी आज अआप फिर से इतने उदास हो सुनते ही उनके आँखे भर सी गयी थी वो बस इतना ही कह पाए की भईया क्या बताऊ  तुम्हारी भाभी की तबियत बहुत ख़राब है समझ नहीं आ रहा की अगर उसे इस उम्र उसे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा और बरबस ही उनके आँखे भर आयी बड़ी मुश्किल से उन्हें समझा कर घर पर वापस भेझा था  वैसे तो वो अपनी पत्नी से बहुँत लड़ते थे पर उनका यह रूप आज ही देखने को मिला था उनकी कही हर बात दिमाग मै चल रही थी की इस उम्र मै और कौन है जो मेरी सुनेगा बच्चे तो अब अपनी ही दुनिया मै रहने लगे है हम जिए या मरे हमारी कौन सुनता है  बस एक येही तो    है जो मुझे समझती है येही अगर  ना रही तो इस उम्र मै तो मै पागल हो जाऊ  गा ......... क्या  बात है तीन नम्बर वालो के यहाँ आज इतनी भाड़ क्यों है  अरे गुप्ता जी आप को नहीं पता की आज लाला जी का देहांत हो गया है दोपहर का खाना खाने के बाद अचानक से उन्हें दिल का दोरा पड़ा जब तक डाक्टर आता वो जा चुके थे  सुन कर गुप्ता जी सन्न रह गय की यह क्या हो गया बस उन्हें सुबहा लाला जी की कही एक एक बात याद आ रही थी की अगर उसे  इस उम्र मै कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा  तुम नहीं समझोगे .....कहते कहते  ही  लाला जी अपने घर से ही नहीं इस दुनिया से चले गए बस रह गया था तो बस उनके कहे यह शब्द की अगर उसे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा ..........................ललित भसोड़           9313052941
कई  दिनों से एक प्रशन मेरे दिमाग मै चल रहा है की सफलता और असफलता मै क्या अंतर है पता ही नहीं चलता है की  कोण      कब सफल हो जाये और कोण कब असफल सफलता के लिए क्या जरुरी है और क्या नहीं समझ ही नहीं आता की सफल होने के क्या माप दंड मै अभी तक नहीं समझ पाया हु  क्या करू की सफल होउ कभी कभी लगता है की शायद इस जीवन मै सफलता नहीं मिलेगी लेकिन फिर भी इस उम्मीद के साथ रोज़ ही अपने काम मै जुट जाता हु की देखू कब तक यह जिन्दगी परीक्षा लेती है

Thursday, July 8, 2010

सर्दी  आज भी अपने चरम पर थी और वो चारो बच्चे घर पर अकेले थे १ कल रात भी उनहोने ठीक से खाना ठीक से नहीं खाया था भूके होने के कारन से वो चारो ही कुछ जयादा थके हुए थे  चारो बच्चे एक दुसरे को ऐसे देख रहे थे मानो वो एक से कह रहे हो की कुछ तो करो अब और भूखा रहा नहीं जाता है उन सब मै से उनका सब से बड़ा भाई अपने आप को सब से जयादा परेशान मह सुस  कर रहा था उसके  मन चल रहा था की वो सब से बड़ा होते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहा है की तभी जोर से बिजली कडकी और कुछ ही देर मे अन्धीरा होने लगा ठंडी ठंडी हवा चलने लगी सर्दी से अब तो कप कपि लगने लगी ऐसे मे कुछ गरम चाय कही से मिल जाती तो सायद बात बन जाय पर चाय आये कंहा से कुछ नहीं सु झ  रहा था  की तभी उनहे यद् आया के घर के मंदिर मे एक गल्ला भगवन के नाम पर रखा  रहा था जिस मे उन की माँ कभी कभी  कुछ पैसे डालती थी फिर क्या था बच्चो ने हिम्मत कर के  वो गल्ला सब से छोटी बहन के मन करने के बाद भी फोड़ दिया  वो कहती ही रह गयी  की वो जब शाम को माँ घर आये गी  तो वो सब बता देगी पर किसे ने उसकी एक ना सुनी और भगवन का गल्ला फुट गया पर यह क्या गल्ला फूटा भी तो उस मे से बस इतना ही पैसा निकला की दूध और चाय पती ही आ पाती खैर उस वक़्त यह ही फैसला लिया गया की दूध और पती तो लाई  जाये घर मे जलाने का इंधन भी नहीं था सो उसका यह हल निकला गया की बाज़ार से रद्दी  कागज लकड़ी जो भी मिले उसे चुन कर लाया जाये और ............और उन बच्चो  ने चाय  इस तरह से बना कर पी ली  कुछ तो रहत मिली थी पर छोटी ने फिर से कह दिया की वो माँ को सब बता देगी की गल्ला उसने  नहीं फोड़ा था सब भी उसे भी मन्ना ही रहे थे की तभी उनका  पिता आज दिन मे ही शराब पी कर आ गया घर मे आते चारो बच्चे  बाहर आ गए  बरसात जो अभी तक धी रे  धी रे  हो रही थी वो अब बहुँत  जोर जोर से होने लगी थी ...बच्चे  अब और भी जयादा परेशान हो गए  थे  की अब वो दोपहर मे क्या खायगे   और बाहर बरसात और तेज  हो गयी थी बच्चो को अब सर्दी भी नहीं लग रही थी  वो अब बस चुप चाप  बैठे थे

Monday, July 5, 2010

रेहड़ी वाला

   उस  दिन भी बहुँत सर्दी थी  वो अभी बाज़ार मै आ कर खड़ा ही हुआ था फठे होठ बिखरे बाल पतला दुबले  शरीर मै से हडिया ऐसे चमक रही थी जैसे सूखे पेड पर टहनिय  कपडे भी जगह जगह  से फठे थे जो उसे सर्दी मै कप्कपने के लिए मजबूर कर रहे थे पर वो था की सर्दी की परवाह  ना करते हुआ  जोर जोर से गला फाड़  कर चिल्लाने लगा प्याज़ ले प्याज़ जिस दुकान के आगे वो खड़ा था उस दुकान का मालिक ये  सुन कर झल्ला गया और जोर से उस पर चिल्लाया अबे क्यों इतना जोर से आवाज लगा रहा है आराम से खड़ा हो  जा नहीं तो दुकान के आगे से हटा दुगा सहम गया था वो बेचारा पर कह कुछ ना सका बस येही बुद बुता रह गया अच्छा  बाबु  जी  और वो ग़ुम सुम सा     ना जाने  क्या सोचने लगा  की इस से  तो गावं मै  ही सही था कम से कम जो भी रुखी सुखी  मिल रही थी कम से कम बच्चो के साथ तो था उसने लोगो से सुन रखा था की इधर बड़े लोग रहते है  शायद कुछ अच्छा बिक जाये पर यहाँ आते ही तो इस का वास्ता इन से पड़ा  जो इन को अपनी दुकान के आगे से ही हटाने की बात कह रहा है इस से अच्छा तो मै वही गाँव  मै ही था पूरी  के चक्कर मै मैंने आधी भी गवा दी बच्चोकी याद भी दिन रात सत्ताती है और वो अपने आप ही बुद बुदाने लगा तभी उस के बुद  बुधा हट  को सिपाही की आवाज ने तोडा अबे किस से पुछ कर लगाई है यहाँ रहेडी जनता नहीं है की यहाँ खड़े होने के पैसे लगते है तुझे किसी ने बताया नहीं     नहीं बाबु जी मुझे नहीं पता था अभी अभी आया हु थोड़ी सी देर में चला जाउगा अबे जाता है या  मरू तेरी..........एक  डंडा  चल निकल गली से नहीं तो फैक दूंगा तेरा ताम तोबड़ा सुन कर रहेडी  वाला  सहम गया और इतना ही बोल  पाया की अच्छा बाबु जी जाता हु और वो अपने आप मै बस येही सोचता हुआ वहा से चल पड़ा की हे  भगवन ये क्या तेरे ही बन्दे है    जो अपने थोड़े से सवार्थ के लिए किसी की मजबूरी को भी नहीं समझते रोक लो इन्हें कही ऐसा ना हो की  किसी रोज़ ये तुम से भी मंदिर मै रहने  के लिए .........................                                              ललित भसोड़               9313052941

Monday, February 1, 2010

चमन कही आबाद हुआ

                               !  चमन कही आबाद हुआ !
कुछ इस तरह से उनके रुख का दीदार किया.
की दूर रहकर भी उन्ही से प्यार किया.
पर बयां ना कर सके वो मृग तृष्णा से,
काँटों में उलझ गए चमन कही आबाद हुआ,
वीरान जहा में दूड़ते रहे वो,रेगिस्तान में,
महज पानी का सैलाब !



ललित भसोड़ धानक 9313052941 

Friday, January 29, 2010

कानून की पुनीर्समीक्षा की गुहार

कहा जाता है की देश का कानून सब के लिए सामान होता पर उसने मेरे दिमाग में शंकापैदा कर दी है ,यह सही है की कानून kaa MUKHYA मकसद कमज़ोर की मदद करना है और येही सोच कर कानून बनाते वक़्त महिलाओ पर होने वाले उत्पीरण को रोकने के लिए कानून कड़ा बनाया गया महलिओं पर होने वाले उत्पीरण पर कार्यवाही करते WAQT केवल महिला का बयान ही काफी है इस कड़े कानून से mahalion पर होने WALA उत्पीरण रुका है या नहीं यह तो सर्वे का विषय है लेकिन इस सच्चाई से मुह नहीं मोड़ा जा सकता है की इस कड़े कानून का कुछ महिलिया द्वारा नाज्जयज फायदा उठा कर दुसरे पक्ष को जिल्लत भरी जिन्दगी जीने के लिए मजबूर कर रही है कई ऐसे मामले मेरे सामने ही घत्तित हुए जिन मे पति पत्नी के आपसी झगडे को पत्नी और उसके परिवार के झूठ के कारन पुरे परिवार (पति पक्ष ) को उसके सजा भुगतनी पड़ी (पडोसी भी सही बात को इस डर से बतने से डरती है की कौन पुलिस के पचड़े मे पड़े बाद मे पुलिस उन्हें बार बारपरेशान करेगी और मौन साध लेते है ) एक मामले मे तो देवरानी नै अपनी जेठ और जेठानी पर झूठा आरोप लगा दिया की उन्होंने भी उसे परेशान किया है उसके इस झूठ ने उसकी जेठानी को इस कदर मानसिक रूप से परेशान कर दिया की उसे लकवा मार गया इसमे पुलिस की भूमिका भी सही नहीं रही उन्होंने भी बिना दुसरे पक्ष की सुने ही उन्हें अंदर करने की ठान ली जिसे उन्हें जमानत लेकर अपनी जान बचानी पड़ी यह तो बस एक बानगी भर है ना जाने और अन्य ऐसे ही मामलो मे किसे के झूठ के कारण और पुलिस की लापरवाही के चलते ना जाने कितने परिवारों को अपनी इज्जत गवानी पड़ी होगी ऐसे मे इस देश का एक जागरुक नागरिक होने के नाते मैंने यह सोचा की कियू ना इस मामले को आप सब के सामने रख कर गुहार करू की ऐसी वेवस्था की जाए की दोनों पक्षों की सुनी जाये और बिना किसी पुखता सबूत के ग्रिफत्तारी ना की जाये और पुलिस को भी उत्पीरण की इज्जात न दी जाये और कानून दुरुपोयोग होने से रोका जाये .................................LALIT BHASOD 9313052341