Tuesday, July 20, 2010
Friday, July 16, 2010
Wednesday, July 14, 2010
आसमान से आग बरस रही है इस साल गर्मी ऐसा लगता है की दिल्ली में पी छले साल के मुकाबले कुछ जयादा ही पड़ रही है उसके ऊपर से बिजली कटोती भी जयादा हो रही है पसीनो में बुरा हाल हो जाता है बी एस इ एस वालो की मनमर्जी चल रही है कही कोई सुनने वाला नहीं है रामनगर कंप्लेंट सेन्टर में बी एस इ एस वालो ने जो अपने आदमी कंप्लेंट लिखने वाले बिठा रखे है उन्हें तो बात तक करने की तमीज नहीं है आधिकतर वो फ़ोन पर ठीक से बात तक नहीं करते है और अपनी मर्ज़ी से काम करते है उन्हें पब्लिक की शिकायत से कुछ लेना देना नहीं कुछ कहने पर तो वो लोग झ गडा करने से भी नहीं चूकते है ऊपर किस के पास जाये कोन सुनेगा पता नहीं पर इतना तो है की दिल्ली वालो को अपने घ र खर्च से जयादा अपने बिजली का बिल भरने की ज्यादा चिंता रहती है क्यों की इन गुंडों को तो तो सरकार का आशीर्वाद मिला हुआ है इन से कोन जीत सकता है
Monday, July 12, 2010
dhanak samaj se appel
कल धानक सभा दिल्ली की एक 15 सदस्यों की एक सभा का आयोजन किया गया जिस मै धानक समाज के 52 गोत्रो पर विचार विमर्श हुआ की किस प्रकार से धानक संमाज पूरे ही देश मै होते हुए भी किस प्रकार से अपनी पहचान को खोता ही जा रहा है आज समाज के लोगो को अपने 52 गोत्रो के बारे मै भी नहीं पता है और बहुँत से लोग अपने गोत्रो को भी छिपा रहे है समाज मै जिस से आने वाले समय में समाज को भारी नुक्सान हो सकता है लोग जाने अनजाने ही अपने ही गोत्रो में शादी विवाह ना कर बेठे क्यों की जिस पराक्र से आज हम अपने गोत्रो को भूलते जा रहे है या अपने गोत्रो को झूठी शान की खातिर बदल लेते है जैसे की खानाग्वल अपने आप को खन्ना लगाने लगे है नीना निया अपने आ को निर्माण सुरलिया सोलंकी ऐसे ही अनेको उदहारण है जो की समाज को नुक्सान पहु चा रहे है लोगो की यह प्रवति बिलकुल भी ठीक नहीं है क्यों की इस से समाज को जो नुक्सान पहु च रहा है उस की कभी भी पूर्ति नहीं होगी और हो सकता है के आने वाले समय में धानक समाज अपनी पह चान ही ना खो दे तो कल उस सभा में समाज के बावन गोत्रो पर चर्चा हुई और यह निष्कर्ष निकला गया की समाज के पूरे बावन गोत्रो को पूरे देश में रह रहे हमारे धानक समाज के लोगो के बीच ले जाया जाये और वास्तविक बावन गोत्रो को समाज के समस्त लोगो तक पहु चाया जाये जिससे लोग अपने लोग पह चान पाए साथ ही लोगो को जागरूक भी किया जाये की वो अपने गोत्रो के साथ छेड़ छाड़ ना करे जिस से की लोगो मै भ्रम ना फेले इस के साथ ही में अपने समस्त धानक भाइ यो से इस ब्लॉग के माध्यम से कहना चहाता हू की उनके पास जो भी जानकारी धानक समाज के बावन गोत्रो के बारे में हो वो कृपा कर के युवा धानक सभा दिल्ली को उनके बारे में बताने का कृपा करे वैसे जो बावन गोत्रो की लिस्ट हमारे पास है वो में य हा पर दाल रहा हू .............बागड़ी ..बमनिया ...बुमरा...बारवाल ..ब छेरी वाल ...भांड ...मावर ....इटकान ...इन्दोर्रिया ... किराड़....कायथ ......क छोटिया ......खानग वाल ....खरोड...खेर्रा ....खटक .....खर कटा ....खुड़िया....गुरिया .... गुडला ....चेडवाल ....झांट.... जाट....टांक ....ढ लोड .... डाबला.....तुर्किया .....तंवर ....दगल....धी मान ...निनानिया ....पचेर वाल .....फरंड....भसोड़ .....बो खड़.....बोकना ...बोकडा ....बावलिया ...भरोटिया..... मुं दडदिया ....मोरवाल .....लडवाल ....ल्गुरिया .....सीलन ....सीवान ....सुरलिया .....रंगभ रिया ......सोलिया .......और ....सोलिया ......................................................................ललित भसोड़ .......9313052941
Saturday, July 10, 2010
PHI R POOJA KYO
कहा जाता है की इन्सान का जनम 85 करोड़ योनियों मे जनम लेने के बाद वो अगर बहुँत अच्छे करम कियो हो तब ही मिलता है ऐसा हमारे हिन्दू धर्म मे भी कहा गया है परन्तु एक बात मेरे दिमाग मे नहीं आती की जब मानव जनम 85 करोड़ जन्मो मे अच्छे कर्मो कोकरने के बाद मिलता है तो फिर इस जनम मे मिलाने वाले दुःख तखलीफ़ किस कर्मो के कारन से होते है ........ ऐसा भी कहा जाता है की उस ईश्वर की मर्ज़ी के बिना एक पता बी नहीं हिलता है जो कुछ भी होता है सब उस की मर्ज़ी से होता है जीवन मे चा हे वो अच्छा हो या फिर बुरा जब सब कुछ उसे की मर्ज़ी से ही हो रहा है तो फिर हमारे जीवन मे पूजा का प्रावधान क्यों बना दिया गया समझ से बिलकुल ही परे है क्यों हम पूजा अर्चना कर उस ईश्वर से प्राथना करते है की वो हमारी दुखो को दूर करे .
Friday, July 9, 2010
mera kyya hoga
क्या बात है लाला जी आज बहुँत उदास नज़र आ रहे हो सुबाह से आप को परेशानी मै देख रहा हु कोई ऐसी वैसी बात तो नहीं है अगर कोई बात है तो बता दो मन हल्का हो जायगा बारहा नम्बर वाले शर्मा जी ने जब बाबु लाल जी से पूछा तो वो कुछ भी ना बता सके बस अपने आप मै ही बतियने लगे तो गुप्ता जी ने उन्हें टोका अरे क्या हुआ लाला जी आज अआप फिर से इतने उदास हो सुनते ही उनके आँखे भर सी गयी थी वो बस इतना ही कह पाए की भईया क्या बताऊ तुम्हारी भाभी की तबियत बहुत ख़राब है समझ नहीं आ रहा की अगर उसे इस उम्र उसे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा और बरबस ही उनके आँखे भर आयी बड़ी मुश्किल से उन्हें समझा कर घर पर वापस भेझा था वैसे तो वो अपनी पत्नी से बहुँत लड़ते थे पर उनका यह रूप आज ही देखने को मिला था उनकी कही हर बात दिमाग मै चल रही थी की इस उम्र मै और कौन है जो मेरी सुनेगा बच्चे तो अब अपनी ही दुनिया मै रहने लगे है हम जिए या मरे हमारी कौन सुनता है बस एक येही तो है जो मुझे समझती है येही अगर ना रही तो इस उम्र मै तो मै पागल हो जाऊ गा ......... क्या बात है तीन नम्बर वालो के यहाँ आज इतनी भाड़ क्यों है अरे गुप्ता जी आप को नहीं पता की आज लाला जी का देहांत हो गया है दोपहर का खाना खाने के बाद अचानक से उन्हें दिल का दोरा पड़ा जब तक डाक्टर आता वो जा चुके थे सुन कर गुप्ता जी सन्न रह गय की यह क्या हो गया बस उन्हें सुबहा लाला जी की कही एक एक बात याद आ रही थी की अगर उसे इस उम्र मै कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा तुम नहीं समझोगे .....कहते कहते ही लाला जी अपने घर से ही नहीं इस दुनिया से चले गए बस रह गया था तो बस उनके कहे यह शब्द की अगर उसे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा ..........................ललित भसोड़ 9313052941
कई दिनों से एक प्रशन मेरे दिमाग मै चल रहा है की सफलता और असफलता मै क्या अंतर है पता ही नहीं चलता है की कोण कब सफल हो जाये और कोण कब असफल सफलता के लिए क्या जरुरी है और क्या नहीं समझ ही नहीं आता की सफल होने के क्या माप दंड मै अभी तक नहीं समझ पाया हु क्या करू की सफल होउ कभी कभी लगता है की शायद इस जीवन मै सफलता नहीं मिलेगी लेकिन फिर भी इस उम्मीद के साथ रोज़ ही अपने काम मै जुट जाता हु की देखू कब तक यह जिन्दगी परीक्षा लेती है
Thursday, July 8, 2010
सर्दी आज भी अपने चरम पर थी और वो चारो बच्चे घर पर अकेले थे १ कल रात भी उनहोने ठीक से खाना ठीक से नहीं खाया था भूके होने के कारन से वो चारो ही कुछ जयादा थके हुए थे चारो बच्चे एक दुसरे को ऐसे देख रहे थे मानो वो एक से कह रहे हो की कुछ तो करो अब और भूखा रहा नहीं जाता है उन सब मै से उनका सब से बड़ा भाई अपने आप को सब से जयादा परेशान मह सुस कर रहा था उसके मन चल रहा था की वो सब से बड़ा होते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहा है की तभी जोर से बिजली कडकी और कुछ ही देर मे अन्धीरा होने लगा ठंडी ठंडी हवा चलने लगी सर्दी से अब तो कप कपि लगने लगी ऐसे मे कुछ गरम चाय कही से मिल जाती तो सायद बात बन जाय पर चाय आये कंहा से कुछ नहीं सु झ रहा था की तभी उनहे यद् आया के घर के मंदिर मे एक गल्ला भगवन के नाम पर रखा रहा था जिस मे उन की माँ कभी कभी कुछ पैसे डालती थी फिर क्या था बच्चो ने हिम्मत कर के वो गल्ला सब से छोटी बहन के मन करने के बाद भी फोड़ दिया वो कहती ही रह गयी की वो जब शाम को माँ घर आये गी तो वो सब बता देगी पर किसे ने उसकी एक ना सुनी और भगवन का गल्ला फुट गया पर यह क्या गल्ला फूटा भी तो उस मे से बस इतना ही पैसा निकला की दूध और चाय पती ही आ पाती खैर उस वक़्त यह ही फैसला लिया गया की दूध और पती तो लाई जाये घर मे जलाने का इंधन भी नहीं था सो उसका यह हल निकला गया की बाज़ार से रद्दी कागज लकड़ी जो भी मिले उसे चुन कर लाया जाये और ............और उन बच्चो ने चाय इस तरह से बना कर पी ली कुछ तो रहत मिली थी पर छोटी ने फिर से कह दिया की वो माँ को सब बता देगी की गल्ला उसने नहीं फोड़ा था सब भी उसे भी मन्ना ही रहे थे की तभी उनका पिता आज दिन मे ही शराब पी कर आ गया घर मे आते चारो बच्चे बाहर आ गए बरसात जो अभी तक धी रे धी रे हो रही थी वो अब बहुँत जोर जोर से होने लगी थी ...बच्चे अब और भी जयादा परेशान हो गए थे की अब वो दोपहर मे क्या खायगे और बाहर बरसात और तेज हो गयी थी बच्चो को अब सर्दी भी नहीं लग रही थी वो अब बस चुप चाप बैठे थे
Monday, July 5, 2010
रेहड़ी वाला
उस दिन भी बहुँत सर्दी थी वो अभी बाज़ार मै आ कर खड़ा ही हुआ था फठे होठ बिखरे बाल पतला दुबले शरीर मै से हडिया ऐसे चमक रही थी जैसे सूखे पेड पर टहनिय कपडे भी जगह जगह से फठे थे जो उसे सर्दी मै कप्कपने के लिए मजबूर कर रहे थे पर वो था की सर्दी की परवाह ना करते हुआ जोर जोर से गला फाड़ कर चिल्लाने लगा प्याज़ ले प्याज़ जिस दुकान के आगे वो खड़ा था उस दुकान का मालिक ये सुन कर झल्ला गया और जोर से उस पर चिल्लाया अबे क्यों इतना जोर से आवाज लगा रहा है आराम से खड़ा हो जा नहीं तो दुकान के आगे से हटा दुगा सहम गया था वो बेचारा पर कह कुछ ना सका बस येही बुद बुता रह गया अच्छा बाबु जी और वो ग़ुम सुम सा ना जाने क्या सोचने लगा की इस से तो गावं मै ही सही था कम से कम जो भी रुखी सुखी मिल रही थी कम से कम बच्चो के साथ तो था उसने लोगो से सुन रखा था की इधर बड़े लोग रहते है शायद कुछ अच्छा बिक जाये पर यहाँ आते ही तो इस का वास्ता इन से पड़ा जो इन को अपनी दुकान के आगे से ही हटाने की बात कह रहा है इस से अच्छा तो मै वही गाँव मै ही था पूरी के चक्कर मै मैंने आधी भी गवा दी बच्चोकी याद भी दिन रात सत्ताती है और वो अपने आप ही बुद बुदाने लगा तभी उस के बुद बुधा हट को सिपाही की आवाज ने तोडा अबे किस से पुछ कर लगाई है यहाँ रहेडी जनता नहीं है की यहाँ खड़े होने के पैसे लगते है तुझे किसी ने बताया नहीं नहीं बाबु जी मुझे नहीं पता था अभी अभी आया हु थोड़ी सी देर में चला जाउगा अबे जाता है या मरू तेरी..........एक डंडा चल निकल गली से नहीं तो फैक दूंगा तेरा ताम तोबड़ा सुन कर रहेडी वाला सहम गया और इतना ही बोल पाया की अच्छा बाबु जी जाता हु और वो अपने आप मै बस येही सोचता हुआ वहा से चल पड़ा की हे भगवन ये क्या तेरे ही बन्दे है जो अपने थोड़े से सवार्थ के लिए किसी की मजबूरी को भी नहीं समझते रोक लो इन्हें कही ऐसा ना हो की किसी रोज़ ये तुम से भी मंदिर मै रहने के लिए ......................... ललित भसोड़ 9313052941
Subscribe to:
Posts (Atom)
